रंजिशें उन्हों ने की :- MrSikaari
रंजिशें उन्हों ने की,
हम ने तो ईश्क़ बयां किया।।
नक्श उनके हमें यूँ मार गये,
इस भँवरे ने तो उनका दीदार किया।।
उनके बाबरी(ज़ुल्फ़) का दिया ग़म हम भुला न सके,
तमन्ना तो हमसाया बनने की थी।
उनकी मैहूम निगाहों ने छाँट दिया।।
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