चाँदनी रात की सैया में। :- MrSikaari
चाँदनी रात की सैया में,
पुरवैया की चाल मध्यम थी।
कवि बैठा बाग़ में,
वातावरण सुगंधित था।।
किट-पतंगों का भिनभिनाना,
गायन मधुर लग रहा था।
रात चाँदनी का वो,
दिलकश नज़ारा लग रहा था।।
रात की मधुरता में,
नशा-सा मुझ को लग रहा था।
स्वर्ग से भी सुंदर,
वो नज़ारा लग रहा था।।
मेहुल बैठा बाग़ में,
सौंदर्य विहार हो रहा था।
रात चाँदनी का वो,
मन को प्रफुल्लित कर रहा था।।
कवि बैठा बाग़ में,
मुस्कान मन्द दे रहा था।
चाँदनी रात का दिलकश,
नज़ारा लग रहा था।।
Written By:- MrSikaari
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