जो चेहरे पहरे के सरताज होते है। :- Niru
जो चेहरे पहरे के सरताज होते है ।
वो कितने सम्मानित लोग हैं जो हमसे हमारा हाल पूछते हैं।
हाल भी एसे पूछते हैं कि बताना अपने हालात भी एक मजबूरी,एक दबाब और हमारी लाचारी के विचार बनते हैं।
हमारी आत्मा को रसातल का दर्शन कराकर वो हमसे बेशुमार लाड-दुलार और प्रेम पाश इज़हार करते हैं।
हमारी चैन भरी सांसो का पल-पल, हमारी सुकून परस्त जीवन का क्षण-क्षण छीन कर वो हमें अपनी धड़कन का साज कहते है।
असामाजिकता की सीमा पार करके वो हमें अपराधी करार करने का समाज में आगाज करते हैं।
अपनी पहुँच के सर्वत्र दायरे में वो हमें हऊे बदनाम करते हैं।
हमारे चेहरे की हंसी छीन कर वो हमें अपने ख्वाबों का तख्तोताज कहते हैं।
स्वर्ण पिंजड़े में हमें कैदी बनाकर वो आजाद कहतें हैं।
वो कितने बेमुरव्वत लोग हैं जो हमारी हस्ती हमारा अस्तित्व मिटाकर हमसें अपनी मोहब्बत का इज़हार करते हैं ।
इसलिए दोस्तों और सम्माननीय पाठकों से हम दरख़्वास्त करते हैं कभी सच के आईने में चेहरों को परखने के बिना इतल्ला दिये तहक़ीक़ात किया करिये, क्योंकि ऐसे चेहरों की तादाद बहुसंख्यक है जो कई मुखोटों को धारण करने में जाबाज़ होते हैं।
- Written by : Niru ( 21 August 2019)
(Senior Member)
बहुत खूब , अच्छा लिखा है।
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